Monday, October 15, 2007

रूड़की चालीसा (चौबीसा)

जनता जनार्दन के अनुरोध पर मेरी तरफ से सबको एक छोटी सी भेंट ........ :)यह कविता मैंने अधिस्नातक प्रथम वर्ष में अपने भवन दिवस पर सुनाई थी। विषयवस्तु की बात करें तो मैंने इसमें प्रथम वर्ष के प्रायः सभी अनुभव इसमें दर्शाने की कोशिश की है। अगर इसके कुछ शब्द अथवा प्रसंग किसी पाठक की समझ में ना आयें तो इसमें मेरी कोई गलती नहीं है। इन्हें समझने के लिए आपको IIT रूड़की की भाषा से अवगत होना पड़ेगा। :) पहले ही बता दूं कि चालीसा होते हुए भी इसमें चौबीस ही छन्द हैं। नाम में क्या रखा है ? भावनाओं को देखिए !

जय रूड़की जय ज्ञान का सागर ।
तुम ही अमावस तुम ही प्रभाकर ॥
लक्ष्य हमारा बस इतना सा ।
फटके ना कोई भी अपने पासा ॥

हम तो सदा ही अव्वल आवें ।
पर किस क्षेत्र में कैसे बतावें ॥
विषय नहीं यह समझाने का ।
समय नहीं यह बतलाने का ॥

आरम्भ करें हम प्रथम दिवस से ।
रूड़की पहुंचे थे हम बस से ॥
गए सारे सपने धरे धराए ।
यह कैसे जंगल में आये ॥

अगला ही दिन आया भयंकर ।
हर विभाग में मारे चक्कर ॥
समय तालिका समझ ना आना ।
विभागों में भगदौड़ मचाना ॥

शाम को फिर जब कमरे में आये ।
NCC प्रभुदेव बुलाये ॥
दिन भर थक कर वापस आना ।
NCC में सर मुन्ड्वाना ॥

प्रकट हुई एक और मज़बूरी । ................................................//रैगिंग :D
सीनीयर्स की हुई इच्छा पूरी ॥
हर बन्दे का यह था कहना ।
नेस्की से तो दूर ही रहना ॥

खैर समय बीता सब चंगा ।
खुद को यहाँ के रंग में रंगा ॥
बोरिअत का जो भी हो मारा ।
CL ही था एक सहारा ॥ .................................................//सिविल लाइंस

पढ़ने का समय नहीं बच पाना ।
मेस का खाना नहीं पच पाना ॥
था आवश्यक सबने जाना ।
अस्पताल का लाभ उठाना ॥

फिर आगे कई सेक्शन आये ।
interview conduct कराए ॥
चापो मिलना नाचना गाना । ........................//chaapo means partyyyyy
जिंदगी का पटरी पर आना ॥

बकर चैट रतजग्गा Bus T ।
इनमें ही बसती है मस्ती ॥
lovers प्वाइंट जो देखा जाये ।
कोई कितनी जगह बताये ॥

वो तैंतीस हम पाच सौ तैंतीस । ...//the frustating sex ratio in IITs :X
कोई देवी मिले हर भक्त की कोशिश ॥
library, नेस्की, सरोजिनी भवना । ..............//the only gals' hostel then
दें प्रेमी सब यहीं पे धरना ॥

पढ़ाई घिसाई क्यों बीच में लावें ।
सबको पता है किसे बतावें ॥
lecture सुनने वाले सब रोयें ।
खुश हैं वही जो क्लास में सोयें ॥ //something about me and melikes :)


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मेरा एक ही सार है, IITR महान
पढने जो भी आये यहाँ पर, बने देश की शान ॥
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©संदीप मिश्रा

4 comments:

Unknown said...

first class sir , bithe way kon se batch se the

Sandeep Mishra said...

tha nahin yaar hoon, m 3rd yr indus.

Ankush Agrawal said...

good sir
i want it
come se come koi achhi si typing pad to use karte hindi likhne ke liye

Sandeep Mishra said...

Yaar typing pad mein koi kami nahin hai. kami tere browser mein hai. just use internet explorer instead of mozilla firefox to view any hindi font :)