Tuesday, February 9, 2010

मेरा परिचय

साधारण पथ का साधारण पथिक,
सुख में उन्मादित, दुःख में व्यथित,
द्वेष रहित, प्रेम सहित, मनमौजी कथित...

कुछ ऐसा है मेरा परिचय, पर चर्चा का यह नहीं विषय...
विषय है यह कि कौन हूँ मैं, क्यों पहचान पे अपनी मौन हूँ मैं...
अब पाठक ही निर्णायक हो, कैसा मेरा परिचायक हो...
अमुक स्थान के अमुक शहर या अमुक गाँव का वासी हूँ,
दिल्ली वाला, मुम्बईया, बंगाली या मद्रासी हूँ...
क्यों इस मद बाबत अंतर हो, क्यों पहचानों का जंतर हो...
द्वेष मिटा के प्रेम करो, क्रोध हटा के धीर धरो...
फिर आ जाना शांति के पथ पर, मेरा है छोटा सा एक घर...
फिर साथ करेंगे शेष सफ़र, साधारण पथ के साधारण पथिक बनकर...